Preface / Foreword (गीता-कविता.कॉम का प्रयोजन)

मैंने www.geta-kavita.com  की  स्थापना  क्यों की:

मैं एक वेज्ञानिक हूँ (Please see rajivsaxena.info).  जीव विज्ञान में शोध करता हूँ और विश्वविद्यालय में पढ़ता हूँ। ऐसे में मेरा साहित्य प्रेम कई लोगों को बड़ी अजूबे की बात लगती है। लोग सोचते हैं कि जो साइंस पढ़ते हैं उनको फिर लिटेरचर में कोई रुचि नहीं रहती। कुछ हद तक यह बात ठीक भी है। कई बार M.Sc. क्लास को पढ़ते हुए मैं स्टूडेंट्स से पूछता हूँ कि आप विज्ञान के अलावा क्या पढ़ते हैं? कोई इक्का दुक्का स्टूडेंट ही मिलता है जो लिटेरचर पढ़ता  हो ।   पर मुझे लगता है कि  लिटेरचर पढ़ना आवश्यक है । इससे आप जीवन और समाज से जुड़े रहते हैं ।
मेरा स्वयं का परिवार हिन्दी लिटेरचर से जुड़ा रहा है । मेरी माँ (स्वर्गीय  डॉक्टर वीरबाल जी )  संस्कृत की प्रोफेसर थीं  और  हिन्दी की कवित्री  थीं ।  मामा जी (स्वर्गीय  डॉक्टर धर्मवीर भारती जी) हिन्दी साहित्य के एक स्तम्भ थे ।  हिन्दी लिटेरचर की विरासत इस तरह मुझे मिली । रात को छत ओर सोने से पहले, अम्मा हम बच्चों को हिदी की कविताएं और कहानियाँ सुनाती थीं ।  सुदामा चरित और अन्य कई कविताएं तब ही से मुझे कंठस्थ हो गईं थीं । पर मेरी पढ़ाई और करिअर  विज्ञान  में  रहा सो जीवन के पांचवें दशक तक हिन्दी में मैंने कुछ स्वयं नहीं किया ।  फिर साल 1999 में मैं अमरीका के वेस्ट वर्जीनिया  में मैं लंबे अरसे तक  तक एक विजिटिंग प्रोफेसर रहा ।  पत्नी को आपने  इंस्टिट्यूट से लंबी छुट्टी नहीं मिली सो वेस्ट वर्जीनिया  प्रवास में मैं अकेला ही रहा ।  इस लंबे एकाकी प्रवास के solitude में कविता की एक बलिष्ठ लहर मुझ में फूट पड़ी और पहली बार मैंने कविता लिखना आरंभ किया । इसी समय मैंने  श्रीमद भागवत गीत का हिन्दी पद्यानुवाद किया जो कि  “गीत काव्य माधुरी” पुस्तक के रूप मे प्रकाशित हुआ ।  लगभग दस साल बाद एक दूसरे लंबे अमरीकी प्रवास (नॉर्थ कैरोलिना) के दौरान  दूसरी पुस्तक “बाल गीत” लिखी गई जो कि Penguin बुक्स  ने छापी । इस दशक मैंने हिन्दी काव्य सागर मैं खूब गोते लगाए और भरपूर आनंद लिया । वर्ष 2005 में मैंने गीत-कविता  वेबसाईट  स्थापित की ।  इसका मूल कारण था हिन्दी भाषी समाज के साथ हिन्दी कविताओं को साझा करना । अब तक geeta-kavita.com पर मैंने लगभग 800 सुंदर कविताएं प्रकाशित की हैं । इनमे से केवल कुछ ही मेरी हैं पर अधिकतर दूसरे प्रसिद्ध या  उभरते कवियों की कविताएं हैं । लेख अधिकतर मेरे लिखे ही हैं । इस वेबसाईट को बनाने और चलाने के पीछे मेरी एक ही कामना रही है – लोगों के साथ हिन्दी कविताओं को पढ़ने का आनंद साझा करना ।  विज्ञान मेरे करिअर की मूल धार रही है पर हिन्दी साहित्य एक बलशाली समांतर धार के रूप में पिछले बीस वर्षों से मेरे साथ रहा है ।
मैं आशा करता हूँ कि पाठक हिन्दी कविताओं का भरपूर आनंद इस प्रयास के फलस्वरूप उठा सकेंगे ।  आपकी  प्रतिक्रियाओं  का स्वागत है । मुझे  आप rajivksaxena@gmail.com  या   admin@geeta-kavita.com  पर संपर्क कर सकते हैं । धन्यवाद !!

प्रोफेसर राजीव कृष्ण सक्सेना

लिंक्स:

Download the geeta-kavita App

Check Also

एम्सटरडैम की यात्रा

एम्सटरडैम की यात्रा – राजीव कृष्ण सक्सेना

Netherlands is a beautiful country. Cool and crisp, clean and efficient. While I often visit …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *