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Posted on Dec 3, 2015 in Contemplation Poems, Frustration Poems, Poor People Poems | 0 comments

यह बच्चा कैसा बच्चा है – इब्ने इंशा

यह बच्चा कैसा बच्चा है – इब्ने इंशा

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Here is a very moving poem of Ibne Insha. How after all the society can be that insensitive to the plight of a child in destitution? Rajiv Krishna Saxena

यह बच्चा कैसा बच्चा है
यह बच्चा काला-काला-सा
यह काला-सा, मटियाला-सा
यह बच्चा भूखा-भूखा-सा
यह बच्चा सूखा-सूखा-सा
यह बच्चा किसका बच्चा है
यह बच्चा कैसा बच्चा है

जो रेत पर तन्हा बैठा है
ना इसके पेट में रोटी है
ना इसके तन पर कपड़ा है
ना इसके सर पर टोपी है
ना इसके पैर में जूता है
ना इसके पास खिलौना है
कोई भालू है कोई घोड़ा है
ना इसका जी बहलाने को
कोई लोरी है कोई झूला है

ना इसकी जेब में धेला है
ना इसके हाथ में पैसा है
ना इसके अम्मी-अब्बू हैं
ना इसकी आपा-खाला है
यह सारे जग में तन्हा है
यह बच्चा कैसा बच्चा है

यह बच्चा कैसे बैठा है
यह बच्चा कब से बैठा है
यह बच्चा क्या कुछ पूछता है
यह बच्चा क्या कुछ कहता है
यह दुनिया कैसी दुनिया है
यह दुनिया किसकी दुनिया है

~ इब्ने इंशा

 
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