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Posted on Dec 31, 2015 in Contemplation Poems | 0 comments

इक पल – राजीव कृष्ण सक्सेना

इक पल – राजीव कृष्ण सक्सेना

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If we look back at our lives we find that there were some moments of elation and exhilaration, some moments of utter sorrow and some moments where suddenly some thing of great importance happened. Rest remains blank, rather mundane. A map of the life can be drawn by joining these important moments alone – Rajiv Krishna Saxena

इक पल है नैनों से नैनों के मिलने का,
बाकी का समय सभी रूठने मनाने का।

इक पल में झटके से हृदय टूक-टूक हुआ,
बाकी का समय नीर नैन से बहाने का।

इक पल की गरिमा ने बुध्द किया गौतम को,
बाकी का समय तपी ज़िंदगी बिताने का।

पासों से पस्त हुए इक पल में धर्मराज,
बाकी का समय कुरुक्षेत्र को सजाने का।

इक पल में सीता का हरण किया रावण ने,
बाकी का समय राम कथा को सुनाने का।

चमक गई दमक गई इक पल नभ पर तड़िता,
बाकी का समय सभी गरज बरस जाने का।

इक पल की महिमा है इक पल का जादू है,
इक पल का निश्चय ही जीवन पर काबू है।

इक पल जल कर करता जीवन पथ आलोकित,
बाकी का समय लक्ष्य छोड़ भटक जाने का।

∼ राजीव कृष्ण सक्सेना

 
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