तेरे बिन – रमेश गौड़

तेरे बिन – रमेश गौड़

Love that graced life is now gone but what does it still means to me? Here is a poem that has all the right metaphors. Rajiv Krishna Saxena

तेरे बिन

जैसे सूखा ताल बच रहे
या कुछ कंकड़ या कुछ काई,
जैसे धूल भरे मेले में
चलने लगे साथ तन्हाई,
तेरे बिन मेरे होने का
मतलब कुछ कुछ ऐसा ही है,
जैसे सिफ़रों की क़तार
बाकी रह जाए बिना इकाई।

जैसे ध्रुवतारा बेबस हो,
स्याही सागर में घुल जाए
जैसे बरसों बाद मिली चिठ्ठी
भी बिना पढ़े घुल जाए
तेरे बिन मेरे होने का
मतलब कुछ कुछ ऐसा ही है,
जैसे लावारिस बच्चे की
आधी रात नींद खुल जाए।

जैसे निर्णय कर लेने पर
मन में एक द्विधा रह जाए,
जैसे बचपन की किताब में
कोई फूल मुँदा रह जाए
मेरे मन में तेरी यादें
अब भी कुछ ऐसे अंकित हैं
जैसे खँडहर पर शासक का
शासन काल खुदा रह जाए।

∼ रमेश गौड़

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