गाँव की तरफ – उदय प्रताप सिंह

गाँव की तरफ – उदय प्रताप सिंह

Simple folks are more sincere, more caring and more human. Simple folks live in villages. In large cities, people are selfish and self centered. This is a general feeling all of us have. Here is a poem depicting just that. Rajiv Krishna Saxena

गाँव की तरफ

कुछ कह रहे हैं खेत और खलियान गाँव की तरफ,
पर नहीं सरकार का है ध्यान गाँव की तरफ।

क्या पढ़ाई‚ क्या सिंचाई‚ क्या दवाई के लिये,
सिर्फ काग़ज़ पर गए अनुदान गाँव की तरफ।

शहर में माँ–बाप भी लगते मुसीबत की तरह,
आज भी मेहमान है मेहमान गाँव की तरफ।

इस शहर के शोर से बहरे भी हो सकते हैं हम,
इसलिये अच्छा है रक्खें कान गाँव की तरफ।

सब पुलिस थाना कचहरी झुकते शहरों के लिये,
बस विधाता और है भगवान गाँव की तरफ।

पत्थरों के शहर में हैं सख्त दिल रोबोट सब,
रह रहे हैं थोड़े से इंसान गाँव की तरफ।

∼ उदय प्रताप सिंह

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