चिट्ठी है किसी दुखी मन की – कुंवर बेचैन

चिट्ठी है किसी दुखी मन की – कुंवर बेचैन

Overwork, irritation and fatigue find expression in our behavior towards others. Here is a observation from the keen eyes of Kunwar Bechain. Rajiv Krishna Saxena

चिट्ठी है किसी दुखी मन की

बर्तन की यह उठका पटकी
यह बात बात पर झल्लाना
चिट्ठी है किसी दुखी मन की।

यह थकी देह पर कर्मभार
इसको खांसी उसको बुखार
जितना वेतन उतना उधार
नन्हें मुन्नों को गुस्से में
हर बार मार कर पछताना
चिट्ठी है किसी दुखी मन की।

इतने धंधे यह क्षीणकाय
ढोती ही रहती विवश हाय
खुद ही उलझन खुद ही उपाय
आने पर किसी अतिथि जन के
दुख में भी सहसा हँस जाना
चिट्ठी है किसी दुखी मन की।

∼ कुंवर बेचैन

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