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एक चाय की चुस्की – उमाकांत मालवीय

एक चाय की चुस्की - उमाकांत मालवीय

People keep a mask on (sipping tea and laughing) but inside there is so much suffering that remains hidden from others. Rajiv Krishna Saxena एक चाय की चुस्की एक चाय की चुस्की, एक कहकहा अपना तो इतना सामान ही रहा चुभन और दंशन पैने यथार्थ के पग–पग पर घेरे रहे …

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