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तुम्हारे पाँव मेरी गोद में – धर्मवीर भारती

तुम्हारे पाँव मेरी गोद में – धर्मवीर भारती

Imagine two lovers sitting quietly. A girl’s  lovely feet are in the lap of the lover. Then let Bharati Ji recite the rest-Rajiv Krishna Saxena तुम्हारे पाँव मेरी गोद में ये शरद के चाँद से उजले धुले–से पांव, मेरी गोद में। ये लहर पर नाचते ताजे कमल की छांव, मेरी …

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