Tag Archives: Mahadevi Varma

फिर एक बार – महादेवी वर्मा

Let me rededicate to you my motherland!

Here is a poem by the well-known poetess Mahadevi Varma, showing her deep devotion and appreciation of the motherland. Rajiv Krishna Saxena फिर एक बार मैं कम्पन हूँ तू करुण राग मैं आँसू हूँ तू है विषाद मैं मदिरा तू उसका खुमार मैं छाया तू उसका अधार मेरे भारत मेरे …

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संसार – महादेवी वर्मा

संसार - महादेवी वर्मा

World is full of delusions that turn ultimately into realization of the truth. In this sweet poem, Mahadevi Ji give several metaphors of this fact of life. Rajiv Krishna Saxena संसार निश्वासों सा नीड़ निशा का बन जाता जब शयनागार, लुट जाते अभिराम छिन्न मुक्तावलियों के वंदनवार तब बुझते तारों …

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