Tag Archives: custom

क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी – हरिवंश राय बच्चन

क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी – हरिवंश राय बच्चन

Does sympathy mean anything or do the kind words said in sympathy essentially lack any substance? Here Harivansh Rai Bachchan poses this rather uncomfortable question. Rajiv Krishna Saxena क्या करूँ संवेदना ले कर तुम्हारी क्या करूँ संवेदना लेकर तुम्हारी? क्या करूँ? मैं दुखी जब-जब हुआ संवेदना तुमने दिखाई, मैं कृतज्ञ …

Read More »