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चंद अशआर गुनगुनाते हैं – अरुणिमा

चंद अशआर गुनगुनाते हैं – अरुणिमा

Here is a lovely gazal by Arunima Ji. I first read it on eKavita, a yahoo group on Hindi and Urdu poetry run by Anoop Bhargawa – Rajiv Krishna Saxena चंद अशआर गुनगुनाते हैं यों ही हम जहमतें उठाते हैं चंद अशआर गुनगुनाते हैं वे बताते हैं राह दुनियां को …

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