How do I accept your love?
क्या तुम लाई अपने मन में, क्या तुम नूतन लाई जो मैं फिर से बंधन झेलूँ, कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ

कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ – हरिवंश राय बच्चन

Love requires great deal of efforts and full involvement. It exhausts the lovers. Then if one has to go through the whole process again! It is very difficult to revisit the old lanes and by lanes of love. Rajiv Krishna Saxena

कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ

कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ
क्या तुम लाई हो चितवन में,
क्या तुम लाई हो चुंबन में,
अपने कर में क्या तुम लाई,
क्या तुम लाई अपने मन में,
क्या तुम नूतन लाई जो मैं
फिर से बंधन झेलूँ
कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ

अश्रु पुराने,आह पुरानी,
युग बाहों की चाह पुरानी,
उथले मन की थाह पुरानी,
वही प्रणय की राह पुरानी,
अध्र्य प्रणय का कैसे अपनी
अंतज्र्वाला में लूँ
कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ

खेल चुका मिट्टी के घर से,
खेल चुका मैं सिंधु लहर से,
नभ के सूनेपन से खेला,
खेला झंझा के झरझर से
तुम में आग नहीं है तब क्या,
संग तुम्हारे खेलूँ
कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ

~ हरिवंश राय बच्चन

लिंक्स:

 

 

Check Also

तब रोक ना पाया मैं आंसू

तब रोक न पाया मैं आँसू – हरिवंश राय बच्चन

When life-long delusions end and we suddenly discover the truth, a heart-break invariably follows. So …

2 comments

  1. बहुत शानदार पढ़ने में मज़ा आ गया।

  2. Качественная швейная фурнитура оптом в Москве для вашего бизнеса, гарантированное качество.
    Фурнитура для одежды оптом Москва https://sewingsupplies.ru/ .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *