The home actually belongs to the lady of the house. We realize it when she is out for a few days. The house looks strange and alien without her… Prof. Rajiv Krishna Saxena
उसका घर
तीस वर्ष हो गए इस घर को खरीदे
मेरी पत्नी ने यह घर सजाया
घर की एक-एक चीज वहीं है
जहां उसने रखी थी
अजीब बात यह है कि
यह घर मुझे अपना सा तभी लगता है
जब पत्नी वहां हो
अगर वह कभी
कुछ दिनों के लिए बाहर जाती है
तो मुझे बड़ा अजनबी सा लगता है यह घर
बिस्तर पर तह लगे कंबल
रसोई में करीने से लगे बर्तन
खूंटी पर टंगे कपड़े
लगता है मुझे मुंह चिढ़ाते हैं
मानो कहते हों
तुम्हारा यहां क्या काम ?
पत्नी नहीं होती तो
मैं अजनबी सा घर में तिरिस्कृत सा घूमता हूं
घर की चीजों से कहता हूं
मुझे रहने दो
कुछ दिनों में असली घरवाली आ जाएगी
तब मुझे फिर से अपना सा लगेगा यह घर
असल में घर उसका ही है
वही मालकिन है
मुझे यहां रहने की सिर्फ इजाज़त भर है ।
राजीव कृष्ण सक्सेना
जनवरी २४, २०२६
Geeta-Kavita Collection of Hindi poems & articles
