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Posted on Feb 22, 2016 in Shabda Chitra Poems | 0 comments

यह अरुण चूड़ का तरुण राग – हरिवंश राय बच्चन

यह अरुण चूड़ का तरुण राग – हरिवंश राय बच्चन

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Another picture drawn from words. An impression of early morning when the birds suddenly start to chirp in unison. Here also we find the amusing and funny idea of crows as the security guards of birds! Note also the lovely lilt of words arranged in a perfect meter – Rajiv K. Saxena

सुनकर इसकी हुंकार वीर
हो उठा सजग अस्थिर समीर,
उड चले तिमिर का वक्ष चीर चिड़ियों के पहरेदार काग!
यह अरुण-चूड़ का तरुण राग!

जग पड़ा खगों का कुल महान,
छिड़ गया सम्मिलित मधुर गान,
पौ फटी, हुआ स्वर्णिम विहान, तम चला भाग, तम गया भाग!
यह अरुण-चूड़ का तरुण राग!

अब जीवन-जागृति-ज्योति दान
परिपूर्ण भूमितल, आसमान,
मानो कण-कण की एक तान, सोना न पड़ेगा पुनः जाग!
यह अरुण-चूड़ का तरुण राग!

∼ हरिवंश राय बच्चन

 
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