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Posted on Feb 22, 2016 in Shabda Chitra Poems | 0 comments

कोई पार नदी के गाता – हरिवंश राय बच्चन

कोई पार नदी के गाता – हरिवंश राय बच्चन

भंग निशा की नीरवता कर
इस देहाती गाने का स्वर
ककड़ी के खेतों से उठकर, आता जमुना पर लहराता
कोई पार नदी के गाता

होंगे भाई-बंधु निकट ही
कभी सोचते होंगे यह भी
इस तट पर भी बैठा कोई, उसकी तानों से सुख पाता
कोई पार नदी के गाता

आज न जाने क्यों होता मन
सुन कर यह एकाकी गायन
सदा इसे मैं सुनता रहता, सदा इसे यह गाता जाता
कोई पार नदी के गाता

∼ हरिवंश राय बच्चन

 
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