Pages Menu
TwitterRssFacebook
Categories Menu

Posted on Jan 22, 2016 in Shabda Chitra Poems | 0 comments

एक गीत और कहो – पूर्णिमा वर्मन

एक गीत और कहो – पूर्णिमा वर्मन

Introduction: See more

Here is a lovely poem on basant by Purnima Varman Ji. This reminds me of a lovely basant geet sung by the famous singer Mallika Pukhraj. You can listen to that geet by clicking on the song title – Lo Phir Basant Aye – on this site. Enjoy both the poem and the geet – Rajiv Krishna Saxena

सरसों के रंग सा‚ महुए की गंध सा
एक गीत और कहो मौसमी वसंत का।

होठों पर आने दो रूके हुए बोल
रंगों में बसने दो याद के हिंदोल
अलकों में झरने दो गहराती शाम
झील में पिघलने दो प्यार के पैगाम
अपनों के संग सा‚ बहती उमंग सा
एक गीत और कहो मौसमी वसंत का।

मलयानिल झोंकों में डूबते दलान
केसरिया होने दो बांह के सिवान
अंगों में खिलने दो टेसू के फूल
सांसों तक बहने दो रेशमी दुकूल
तितली के रंग सा‚ उड़ती पतंग सा
एक गीत और कहो मौसमी वसंत का।

∼ पूर्णिमा वर्मन

Classic View Home

1,073 total views, 1 views today

Post a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *