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Posted on Jan 14, 2016 in Hasya Vyang Poems, Life And Time Poems, Love Poems | 0 comments

विज्ञान विद्यार्थी का प्रेम गीत – धर्मेंद्र कुमार सिंह

विज्ञान विद्यार्थी का प्रेम गीत – धर्मेंद्र कुमार सिंह

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How would a student of science express his love? Here is a lovely poem by Dharmendra Kumar Singh. Rajiv Krishna Saxena

अवकलन समाकलन
फलन हो या चलन­कलन
हरेक ही समीकरण
के हल में तू ही आ मिली।

घुली थी अम्ल क्षार में
विलायकों के जार में
हर इक लवण के सार में
तू ही सदा घुली मिली।

घनत्व के महत्व में
गुरुत्व के प्रभुत्व में
हर एक मूल तत्व में
तू ही सदा बसी मिली।

थी ताप में थी भाप में
थी व्यास में थी चाप में
हो तौल में कि माप मे
सदा तू ही मुझे मिली।

तुझे ही मैनें था पढ़ा
तेरे सहारे ही बढ़ा
हूं आज भी वहीं खड़ा
जहां मुझे थी तू मिली।

∼ धर्मेंद्र कुमार सिंह

 
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