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Posted on Nov 6, 2016 in Frustration Poems, Love Poems | 0 comments

सूर्य–सा मत छोड़ जाना – निर्मला जोशी

सूर्य–सा मत छोड़ जाना – निर्मला जोशी

Introduction: See more

A relationship is based upon total trust. Breaking that trust destroys the relationship. Here is a pleading to the love for not breaking the trust. – Rajiv Krishna Saxena

मैं तुम्हारी बाट जोहूँ
तुम दिशा मत मोड़ जाना

तुम अगर ना साथ दोगे
पूर्ण कैसे छंद होंगे
भावना के ज्वार कैसे
पक्तिंयों में बंद होंगे

वर्णमाला में दुखों की
और कुछ मत जोड़ जाना

देह से हूँ दूर लेकिन
हूँ हृदय के पास भी मैं
नयन में सावन संजोए
गीत भी मधुमास भी मैं

तार में झंकार भर कर
बीन–सा मत तोड़ जाना

पी गई सारा अंधेरा
दीप–सी जलती रही मैं
इस भरे पाषाण युग में
मोम सी गलती रही मैं

प्रात को संध्या बना कर
सूर्य–सा मत छोड़ जाना

~ निर्मला जोशी

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