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Posted on Jan 27, 2016 in Frustration Poems, Life And Time Poems, Love Poems | 0 comments

सोच सुखी मेरी छाती है – हरिवंश राय बच्चन

सोच सुखी मेरी छाती है – हरिवंश राय बच्चन

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He loved her and she loved him but they were not destined to be together. Even as he lost her, he is contented for the reasons Harivansh Rai Bachchan Ji tells in his poem – Rajiv Krishna Saxena

दूर कहां मुझसे जाएगी
केसे मुझको बिसराएगी
मेरे ही उर की मदिरा से तो, प्रेयसी तू मदमाती है
सोच सुखी मेरी छाती है।

मैंने कैसे तुझे गंवाया
जब तुझको अपने मेँ पाया?
पास रहे तू किसी ओर के, संरक्षित मेरी थाती है
सोच सुखी मेरी छाती है।

तू जिसको कर प्यार, वही मैं
अपने में ही आज नही मैं
किसी मूर्ति पर फूल चढ़ा तू, पूजा मेरी हो जाती है
सोच सुखी मेरी छाती है।

~ हरिवंश राय बच्चन

 
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