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रंजिश ही सही – अहमद फ़राज़

[learn_more caption=”Introduction: See more”]“Upset you may be, please come to me even if for hurting me again” says the first line of this famous gazal. The pining of heart that Urdu poetry expresses is rarely seen in Hindi poetry. This lovely gazal has been sung equally beautifully by Mehdi Hassan, Rajiv Krishna Saxena[/learn_more]

रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिये आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिये आ

कुछ तो मेरे पिंदारे–मुहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिये आ

पहले से मिरासिम न सही फिर भी कभी तो
रस्मो–रहे–दुनियाँ ही निभाने के लिये आ

किस–किस को बतााएंगे जुदाई का सबब हम
तू मुझसे खफ़ा है तो जमाने के लिये आ

अब तक दिले–खुशफ़हम को तुझ से हैं उमीदें
आ, आखरी शमएँ भी बुझाने के लिये आ

माना कि मुहब्बत का छुपाना है मुहब्बत
चुपके से किसी रोज़ जताने के लिये आ

जैसे तुझे आते हैं न आने के बहाने
ऐसे ही किसी रोज़ न जाने के लिये आ

∼ अहमद फ़राज़

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