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Posted on Mar 17, 2016 in Inspirational Poems, Life And Time Poems, Love Poems, Shabda Chitra Poems | 0 comments

कौन यहाँ आया था – दुष्यंत कुमार

कौन यहाँ आया था – दुष्यंत कुमार

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In the hum-drum of life, some times some one comes and suddenly there is excitement. Things may go topsy-turvy but who cares! At least the monotony has broken. Here is a lovely poem by Dushyant Kumar. The poem reminds me of the song “Kaun Aaya” in the movie “Katha”. Rajiv Krishna Saxena.

कौन यहाँ आया था
कौन दिया बाल गया
सूनी घर-देहरी में
ज्योति-सी उजाल गया।

पूजा की बेदी पर
गंगाजल भरा कलश
रक्खा था, पर झुक कर
कोई कौतुहलवश
बच्चों की तरह हाथ
डाल कर खंगाल गया।

आँखों में तिरा आया
सारा आकाश सहज
नए रंग रँगा थका-
हारा आकाश सहज
पूरा अस्तित्व एक
गेंद-सा उछाल गया।

अधरों में राग, आग
अनमनी दिशाओं में
पार्श्व में, प्रसंगों में
व्यक्ति में, विधाओं में
साँस में, शिराओं में
पारा-सा ढाल गया।

∼ दुष्यंत कुमार

 
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