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Posted on Jul 3, 2017 in Contemplation Poems, Love Poems | 0 comments

चाँद को देखो – आरसी प्रसाद सिंह

चाँद को देखो – आरसी प्रसाद सिंह

Introduction: See more

Here is a well known poem written by Aarsi Prasad Singh. Different people may have different perspectives and may see things differently and only some may appreciate. Thus moon is best appreciated through the eyes of a chakoor Rajiv Krishna Saxena

चाँद को देखो चकोरी के नयन से
माप चाहे जो धरा की हो गगन से।

मेघ के हर ताल पर
नव नृत्य करता
राग जो मल्हार
अम्बर में उमड़ता

आ रहा इंगित मयूरी के चरण से
चाँद को देखो चकोरी के नयन से।

दाह कितनी
दीप के वरदान में है
आह कितनी
प्रेम के अभिमान में है

पूछ लो सुकुमार शलभों की जलन से
चाँद को देखो चकोरी के नयन से।

लाभ अपना
वासना पहचानती है
किन्तु मिटना
प्रीति केवल जानती है

माँग ला रे अमृत जीवन का मरण से
चाँद को देखो चकोरी के नयन से
माप चाहे जो धरा की हो गगन से।

~ आरसी प्रसाद सिंह

 
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