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Posted on Dec 7, 2015 in Frustration Poems, Love Poems, Nostalgia Poems | 0 comments

भूले हुओं का गीत – गिरिजा कुमार माथुर

भूले हुओं का गीत – गिरिजा कुमार माथुर

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An old flame suddenly come across after decades. It can be uncomfortable and the only way to get through the situation is to pretend that it never happened. Here is a famous poem of Girija Kumar Mathur. Rajiv Krishna Saxena

बरसों के बाद कभी
हम तुम यदि मिलें कहीं
देखें कुछ परिचित से
लेकिन पहचाने ना

याद भी न आये नाम
रंग, रूप, नाम, धाम
सोचें यह संभव है
पर, मन से माने ना

हो न याद, एक बार
आया तूफान, ज्वार
बन्द मिटे पृष्ठों को
पढ़ने की ठानें ना

बातें जो साथ हुईं
बातें जो साथ गईं
आँखें जो मिली रहीं
उनको भी जानें ना।

∼ गिरिजा कुमार माथुर

 
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