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Posted on Aug 31, 2015 in Inspirational Poems | 0 comments

आज ही होगा – बालकृष्ण राव

आज ही होगा – बालकृष्ण राव

[Go ahead and do it, if you feel a strong motivation arising some where deep inside you. Because – Umangen yun akaran hi nahin uthteen… This poem touches somewhere deep What a magic Balkrishna Rao Ji has woven! Artistic interpratation by Garima Saxena – Rajiv Krishna Saxena]

मनाना चाहता है आज ही?
तो मान ले
त्यौहार का दिन आज ही होगा।

उमंगें यूं अकारण ही नहीं उठतीं,
न अनदेखे इशारों पर
कभी यूं नाचता मन;
खुले से लग रहे हैं द्वार मंदिर के
बढ़ा पग,
मूर्ति के श्रंगार का दिन
आज ही होगा।

न जाने आज क्यों दिल चाहता है ­
स्वर मिला कर
अनसुने स्वर में किसी के
कर उठे जयकार।

न जाने क्यों
बिना पाये हुए भी दान
याचक मन
विकल है
व्यक्त करने के लिये आभार।

कोई तो, कहीं तो
प्रेरणा का स्रोत होगा ही ­
उमंगें यूं अकारण ही नहीं उठतीं,
नदी में बाढ़ आई है
कहीं पानी गिरा होगा।

अचानक शिथिल­बंधन हो रहा है आज
मोक्षासन्न बंदी मन ­
किसी की तो
कहीं कोई भगीरथ­साधना पूरी हुई होगी,
किसी भागीरथी के
भूमि पर अवतार का दिन
आज ही होगा।

~ बालकृष्ण राव

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