Pages Menu
Categories Menu

Posted on Feb 26, 2016 in Hasya Vyang Poems | 0 comments

वह युग कब आएगा – बेधड़क बनारसी

वह युग कब आएगा – बेधड़क बनारसी

Introduction: See more

A funny old and famous poem, just for reading and smiling / laughing. Illustration is by Garima Saxena.- Rajiv K. Saxena

जब पेड़ नहीं केवल शाखें होंगी
जब चश्मे के ऊपर आंखें होंगी

वह युग कब आएगा?

जब पैदा होने पर मातमपुरसी होगी
जब आदमी के ऊपर बैठी कुरसी होगी

वह युग कब आएगा?

जब धागा सुई को सियेगा
जब सिगरेट आदमी को पियेगा

वह युग कब आएगा?

जब अकल कभी न पास फटकेगी
जब नाक की जगह दुम लटकेगी

वह युग कब आएगा?

जब बुराई लोग ढूंढेंगे भलाई में
जब पानी बिकेगा दियासलाई में

वह युग कब आएगा?

जब गाड़ी घोड़े को खींचेगी
जब खेती नहरों को सींचेगी

वह युग कब आएगा?

जब बिना दरवाजों खिड़कियों का घर होगा
जब पेट में रेफरीजरटिर और दिल में हीटर होगा

वह युग कब आएगा?

जब श्रोता कविता पढ़ेंगे कवि सुनेंगे
जब एम एल ए ही वोटरों को चुनेंगे

वह युग कब आएगा?

जब टिकट लेकर चलने की कड़ी मनाही होगी
जब पलेटफार्म चलेंगे ट्रेन खड़ी रहेगी

वह युग कब आएगा?

जब गड्ढे आकाश में धंसेंगे
जब वीर रस सुन कर लोग हंसेंगे

वह युग कब आएगा?

जब किताब की जगह चिट होगी
जब अंगूठी कमर में फिट होगी

वह युग कब आएगा?

जब चकोर चोरी से आकाश को चुग लेगा
जब ज्वालामुखी अइसक्रीम उगलेगा

वह युग कब आएगा?

∼ बेधड़क बनारसी

 
Classic View Home

2,512 total views, 1 views today

Post a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *