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Posted on Nov 7, 2015 in Hasya Vyang Poems | 0 comments

साल आया है नया – हुल्लड़ मुरादाबादी

साल आया है नया – हुल्लड़ मुरादाबादी

Introduction: See more

This year is coming to an end. New year would soon arrive. Here are some suggested resolutions from Hullad Muradabadi. Rajiv Krishna Saxena

यार तू दाढ़ी बढ़ा ले, साल आया है नया
नाई के पैसे बचा ले, साल आया है नया।

तेल कंघा पाउडर के खर्च कम हो जाएँगे
आज ही सर को घुटा ले, साल आया है नया।

चाहता है हसीनों से तू अगर नजदीकियाँ
चाट का ठेला लगा ले, साल आया है नया।

जो पुरानी चप्पलें हैं उन्हें मंदिरों पर छोड़ कर
कुछ नए जूते उठा ले, साल आया है नया।

मैं अठन्नी दे रहा था तो भिखारी ने कहा
तू यहीं चादर बिछा ले, साल आया है नया।

दो महीने बर्फ़ गिरने के बहाने चल गए
आज तो हुल्लड़ नहा ले, साल आया है नया।

दौड़ में यश और धन की जब पसीना आए तो
‘सब्र’ साबुन से नहा ले, साल आया है नया।

मौत से तेरी मिलेगी, फैमिली को फ़ायदा
आज ही बीमा करा ले, साल आया है नया।

भूल जा शिकवे, शिकायत, ज़ख्म पिछले साल के
साथ मेरे मुस्कुरा ले, साल आया है नया।

∼ हुल्लड़ मुरादाबादी

 
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