Pages Menu
TwitterRssFacebook
Categories Menu

Posted on Mar 7, 2016 in Hasya Vyang Poems | 0 comments

नेताओं का चरित्र – माणिक वर्मा

नेताओं का चरित्र – माणिक वर्मा

Introduction: See more

Here is a funny poem by hasya kavi Manik Verma on the in-affordability of fresh vegetables by common people. Illustration is by yours truly. – Rajiv Krishna saxena

सब्जी वाला हमें मास्टर समझता है
चाहे जब ताने कसता है
‘आप और खरीदोगे सब्जियां!
अपनी औकात देखी है मियां!
हरी मिर्च एक रुपए की पांच
चेहरा बिगाड़ देगी आलुओं की आंच
आज खा लो टमाटर
फिर क्या खाओगे महीना–भर?
बैगन एक रुपए के ढाई
भिंडी को मत छूना भाई‚
पालक पचास पैसे की पांच पत्ती
गोभी दो आने रत्ती‚
कटहल का भाव पूछोगे
तो कलेजा हिल जाएगा
ये नेताओं का चरित्र नहीं है जो
चार आने पाव मिल जाएगा!’

~ माणिक वर्मा

 
Classic View Home

2,576 total views, 8 views today

Post a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *