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Posted on Jan 14, 2016 in Frustration Poems, Inspirational Poems | 0 comments

साक्षात्कार – श्रीप्रकाश शुक्ल

साक्षात्कार – श्रीप्रकाश शुक्ल

Introduction: See more

This lovely poem says some thing that I as a teacher have often seen. Super talented students from Indian heartland, small towns and villages falter in interviews when forced to reply in English. At JNU we often encourage students who are not easy with English to explain in Hindi. And we often get gems!! Rajiv Krishna Saxena

ऍम एस सी मैथ्स के
प्रविष्टि हेतु चयन होने थे
गुप्ता जी दाखिल हुए
सामान्य कद चेहरा भोला
साथ पुस्तकों से भरा
खद्दर का झोला
प्रश्न पूछे जाते
गुप्ता जी उत्सुकता से
उचकते फिर बैठ जाते
गुप्ता जी उत्तर जानते थे
अकुलाते
भाषा की दुरुहता से
बता नहीं पाते थे
अक्स्मात् टूट पड़ा
शब्दों में मुखरित यों
फूट पड़ा
“कछु सवाल हिन्दिउ में
पुछहो के अंग्रेजी ई झाड़त रेहयो!”
विभागाध्यक्ष समझ गए
गुप्ता जी क्यों उलझ गए
तुरंत प्रश्न किया
एक त्रिभुज के तीन शीर्षों के
निर्देशांक हैं
शून्य शून्य एक चार छः चार
क्षेत्रफल बताइये
गुप्ता जी ने क्षणिक किया विचार
दोहराया एक बार
शून्य शून्य एक चार छः चार
बोल पड़े
आधार गुणें लम्ब बटे दो
इतना सा ही प्रश्न बस
क्षेत्रफल हुआ दस
और भी प्रश्न हुए अनेक
कठिन एक से एक
सभी उत्तर ज्ञान से भरे थे
सही सटीक खरे थे
चलते चलते मैं पूछ बैठा
पुस्तकें साथ लाने का
प्रयोजन क्या
उत्तर मिला
“इतना भी नहींं जानते हम क्या
आप सवाल पूछें
हम उत्तर दें
आप न मानें तो
पन्ना खोल कर दिखायदें”
हम सब चकित थे
देखते रहे विस्मय से
समझ गए समय से
गुप्ता जी पूर्ण थे ज्ञान से
आत्म विश्वास से।

∼ श्रीप्रकाश शुक्ल

 
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