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Posted on Feb 22, 2016 in Frustration Poems | 0 comments

फूल, मोमबत्तियां, सपने – धर्मवीर भारती

फूल, मोमबत्तियां, सपने – धर्मवीर भारती

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Are all these struggles of life really worth it? This is a question that we often ask ourselves. Bharti Ji says in this lovely poem says that all this has a larger meaning and life is after all a medley of different hues and colors and each one must be endured – Rajiv Krishna Saxena

यह फूल, मोमबत्तियां और टूटे सपने
ये पागल क्षण
यह काम–काज दफ्तर फाइल, उचटा सा जी
भत्ता वेतन,
ये सब सच है!
इनमें से रत्ती भर न किसी से कोई कम,
अंधी गलियों में पथभृष्टों के गलत कदम
या चंदा की छाय में भर भर आने वाली आँखे नम,
बच्चों की सी दूधिया हंसी या मन की लहरों पर
उतराते हुए कफ़न!
ये सब सच है!
जीवन है कुछ इतना विराट, इतना व्यापक
उसमें है सबके लिए जगह, सबका महत्व,
ओ मेजों की कोरों पर माथा रख–रख कर रोने वाले
यह दर्द तुम्हारा नही सिर्फ, यह सबका है।
सबने पाया है प्यार, सभी ने खोया है
सबका जीवन है भार, और सब जीते हैं।
बेचैन न हो–
यह दर्द अभी कुछ गहरे और उतरता है,
फिर एक ज्योति मिल जाती है,
जिसके मंजुल प्रकाश में सबके अर्थ नये खुलने लगते,
ये सभी तार बन जाते हैं
कोई अनजान अंगुलियां इन पर तैर–तैर,
सबसे संगीत जगा देती अपने–अपने
गूंध जाते हैं ये सभी एक मीठी लय में
यह काम–काज, संघर्ष विरस कड़वी बातें
ये फूल, मोमबत्तियां और टूटे सपने
यह दर्द विराट जिंदगी में होगा परिणित
है तुम्हे निराशा फिर तुम पाओगे ताकत
उन अँगुलियों के आगे कर दो माथा नत
जिसके छू लेने लेने भर से फूल सितारे बन जाते हैं ये मन के छाले,
ओ मेजों की कोरों पर माथा रख रख कर रोने वाले–
हर एक दर्द को नये अर्थ तक जाने दो?

~ धर्मवीर भारती

 
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