Categories
Frustration Poems Life And Time Poems Shabda Chitra Poems

घर की बात – प्रेम तिवारी

[learn_more caption=”Introduction: See more”]A joint family has lots of issues and people keep many things hidden in their hearts. At quiet times many thoughts jostle around in the mind. This short poem illustrates this thought process. Rajiv Krishna Saxena[/learn_more]

जाग–जागे सपने भागे
आँचल पर बरसात
मैं होती हूँ, तुम होते हो
सारी सारी रात।

नीम–हकीम मर गया कब का
घर आँगन बीमार
बाबू जी तो दस पैसा भी
समझे हैं दीनार
ऊब गयी हूँ
कह दूंगी मैं ऐसी–वैसी बात।

दादी ठहरीं भीत पुरानी
दिन दो दिन मेहमान
गुल्ली–डंडा खेल रहे हैं
बच्चे हैं नादान
टूटी छाजन झेल न पाएगी
अगली बरसात

हल्दी के सपने आते हैं
ननदी को दिन–रैन
हमे पता है सोलह में
मन होता है बेचैन
कोई अच्छा सा घर देखो
ले आओ बारात।

∼ प्रेम तिवारी

 
[button link=”http://www.geeta-kavita.com/hindi_sahitya.asp?id=513″ newwindow=”yes”]Classic View[/button] [button link=”http://www.geeta-kavita.com/wordpress/”]Home[/button]

 1,101 total views,  2 views today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *