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Posted on Feb 9, 2016 in Desh Prem Poems, Old Classic Poems | 0 comments

हिमाद्रि तुंग शृंग से – जयशंकर प्रसाद

हिमाद्रि तुंग शृंग से – जयशंकर प्रसाद

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Here is an old classic inspirational poem by Jay Shankar Prasad – Rajiv Krishna Saxena

हिमाद्रि तुंग शृंग से
प्रबुद्ध शुद्ध भारती–
स्वयं प्रभा समुज्ज्वला
स्वतंत्रता पुकारती–

‘अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़- प्रतिज्ञ सोच लो,
प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो!’

असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ
विकीर्ण दिव्यदाह-सी,
सपूत मातृभूमि के–
रुको न शूर साहसी!

अराति सैन्य–सिंधु में, सुवाड़वाग्नि से जलो,
प्रवीर हो, जयी बनो – बढ़े चलो, बढ़े चलो!

∼ जयशंकर प्रसाद

 
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