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Posted on Jan 27, 2016 in Bal Kavita, Contemplation Poems, Inspirational Poems | 0 comments

पक्षी और बादल – रामधारी सिंह दिनकर

पक्षी और बादल – रामधारी सिंह दिनकर

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Borders between nations are man-made. Nature however has no regards for these borders. Dinker Ji puts is very well in this poem. Rajiv Krishna Saxena

पक्षी और बादल
ये भगवान के डाकिये हैं,
जो एक महादेश से
दूसरे महादेश को जाते हैं।

हम तो समझ नहीं पाते हैं,
मगर उनकी लायी चिठि्ठयाँ
पेड़, पौधे, पानी और पहाड़
बाँचते हैं।

हम तो केवल यह आँकते हैं
कि एक देश की धरती
दूसरे देश को सुगंध भेजती है।

और वह सौरभ हवा में तैरते हुए
पक्षियों की पाँखों पर तिरता है।

और एक देश का भाप
दूसरे देश का पानी
बनकर गिरता है।

∼ रामधारी सिंह ‘दिनकर’

 
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