Pages Menu
TwitterRssFacebook
Categories Menu

Posted on Jan 25, 2016 in Contemplation Poems, Inspirational Poems | 0 comments

मेरी थकन उतर जाती है – राम अवतार त्यागी

मेरी थकन उतर जाती है – राम अवतार त्यागी

Introduction: See more

Here is one of the basic truths of life. Genuine happiness comes only by serving others. Working only for self interests never brings true happiness. This truth is beautifully stated in this poem by Ram Avtar Tyagi Ji. Look specially at last two lines! Rajiv Krishna Saxena

हारे थके मुसाफिर के चरणों को धोकर पी लेने से
मैंने अक्सर यह देखा है मेरी थकन उतर जाती है।

कोई ठोकर लगी अचानक
जब-जब चला सावधानी से,
पर बेहोशी में मंजिल तक
जा पहुँचा हूँ आसानी से;
रोने वाले के अधरों पर अपनी मुरली धर देने से
मैंने अक्सर यह देखा है, मेरी तृष्णा मर जाती है।

प्यासे अधरों के बिन परसे
पुण्य नहीं मिलता पानी को,
याचक का आशीष लिये बिन
स्वर्ग नहीं मिलता दानी को;
खाली पात्र किसी का अपनी प्यास बुझा कर भर देने से
मैंने अक्सर यह देखा है, मेरी गागर भर जाती है।

लालच दिया मुक्ति का जिसने
वह ईश्वर पूजना नहीं है,
बन कर वेदमंत्र-सा मुझको
मंदिर में गूँजना नहीं है;
संकटग्रस्त किसी नाविक को निज पतवार थमा देने से
मैंने अक्सर यह देखा है, मेरी नौका तर जाती है।

∼ राम अवतार त्यागी

 
Classic View Home

832 total views, 1 views today

Post a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *