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Posted on Feb 2, 2016 in Contemplation Poems, Inspirational Poems, Life And Time Poems | 0 comments

मेरा खरापन शेष है – सूर्यकुमार पांडेय

मेरा खरापन शेष है – सूर्यकुमार पांडेय

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People have convictions but make compromises. Some of us however manage to carry our convictions in spite of pressures from all around, and feel proud of it. This is how Suryakumar Pandey sees it. Rajiv Krishna Saxena

गांव में मैैं गीत के आया‚ मुझे ऐसा लगा‚
मेरा खरापन शेष है।

वृक्ष था मैं एक‚ पतझड़ में रहा मधुमास सा‚
पत्र–फल के बीच यह जीवन जिया सन्यास सा‚
कोशिशें बेशक मुझे जड़ से मिटाने को हुईं‚
मेरा हरापन शेष है।

सीख पाया मैं नहीं इस दौर जीने की कला‚
धोंट पाया स्वार्थ पल को भी नहीं मेरा गला‚
गागरें रीतीं न मेरी किसी प्यासे घाट पर‚
मेरा भरापन शेष है।

~ सूर्यकुमार पांडेय

 
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