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Posted on Jan 25, 2016 in Contemplation Poems, Frustration Poems, Life And Time Poems | 2 comments

मीलों तक – कुंवर बेचैन

मीलों तक – कुंवर बेचैन

Introduction: See more

What would have happened if we had only happiness in life? That would have been too monotonous. A mix of happiness and sorrows is perhaps the right mix. Read some lovely verses penned by Kunwar Bechain – Rajiv Krishna Saxena

जिंदगी यूँ भी जली‚ यूँ भी जली मीलों तक
चाँदनी चार कदम‚ धूप चली मीलों तक।

प्यार का गाँव अजब गाँव है जिसमे अक्सर
खत्म होती ही नहीं दुख की गली मीलों तक।

घर से निकला तो चली साथ में बिटिया की हँसी
खुशबुएँ देती रही नन्हीं कली मीलों तक।

माँ के आँचल से जो लिपटी तो घुमड़ कर बरसी
मेरी पलकों में जो पीर पली मीलों तक।

मैं हुआ चुप तो कोई और उधर बोल उठा
बात यह है कि तेरी बात चली मीलों तक।

हम तुम्हारे हैं ‘कुँवर’ उसने कहा था इक दिन
मन में घुलती रही मिसरी की डली मीलों तक।

∼ कुंवर बेचैन

 
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2 Comments

  1. One of the best poem ever read!

  2. Best poems in India

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