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Posted on Sep 11, 2017 in Contemplation Poems | 0 comments

लोग हर मोड़ पे – राहत इंदौरी

लोग हर मोड़ पे – राहत इंदौरी

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Rahat Indori is a very well known shayar. Here are some of the verses penned by him. Rajiv Krishna Saxena

लोग हर मोड़ पे रुक रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं

मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ
रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं

नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों से
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं

मोड़ होता है जवानी का संभलने के लिए
और सब लोग यहीं आके फिसलते क्यों हैं

~ राहत इंदौरी

 
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