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Posted on Feb 2, 2016 in Contemplation Poems, Frustration Poems | 0 comments

क्या वह नहीं होगा – कुंवर नारायण

क्या वह नहीं होगा – कुंवर नारायण

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Here is a thought provoking poem of Sahitya Academy Award winning well known poet Kunwar Narayan Ji. Reviewing what has been happening in our country. We have conceded our life styles to the West. Look at the line “will they buy and take away our children?”. We are just left with the imagery of our past glory. But is that how things will go on? Rajiv Krishna Saxena

क्या फिर वही होगा
जिसका हमें डर है?
क्या वह नहीं होगा
जिसकी हमें आशा थी?

क्या हम उसी तरह बिकते रहेंगे
बाजारों में
अपनी मूर्खताओं के गुलाम?

क्या वे खरीद ले जाएंगे
हमारे बच्चों को दूर देशों में
अपना भविष्य बनवाने के लिये?

क्या वे फिर हमसे उसी तरह
लूट ले जाएंगे हमारा सोना
हमें दिखलाकर कांच के चमकते टुकड़े?

और हम क्या इसी तरह
पीढ़ी–दर–पीढ़ी
उन्हें गर्व से दिखाते रहेंगे
अपनी प्राचीनताओं के खंडहर
अपने मंदिर मस्जिद गरुद्वारे?

∼ कुंवर नारायण

 

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