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Posted on Dec 9, 2015 in Contemplation Poems, Old Classic Poems | 0 comments

जीवन की ही जय है – मैथिली शरण गुप्त

जीवन की ही जय है – मैथिली शरण गुप्त

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Life is fleeting and short-lived. Death is feared by all. Rashtra Kavi Maithili Sharan Gupt presents an alternative view. Life is precious and a miracle and we should rejoice in it. Living beings die but the life goes on. Rajiv Krishna Saxena

मृषा मृत्यु का भय है
जीवन की ही जय है

जीव की जड़ जमा रहा है
नित नव वैभव कमा रहा है
पिता पुत्र में समा रहा है

यह आत्मा अक्षय है
जीवन की ही जय है

नया जन्म ही जग पाता है
मरण मूढ़-सा रह जाता है
एक बीज सौ उपजाता है

सृष्टा बड़ा सदय है
जीवन की ही जय है

जीवन पर सौ बार मरूँ मैं
क्या इस धन को गाड़ धरूँ मैं
यदि न उचित उपयोग करूँ मैं

तो फिर महाप्रलय है
जीवन की ही जय है

∼ मैथिली शरण गुप्त (राष्ट्र कवि)

 
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