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Posted on Jan 25, 2016 in Contemplation Poems, Frustration Poems, Life And Time Poems | 0 comments

इंतजार – राजीव सक्सेना

इंतजार – राजीव सक्सेना

Introduction: See more

Throughout life, we wait for something or the other. One wish fulfilled is replaced by many more. There is no end. But as we age, we become more acutely aware of this endless wait. Our own sense of impotency enhances the awareness of this wait. Rajiv Krishna Saxena

जिंदगी सारी कटी
करते करते इंतजार
सिर्फ अब बढती उम्र मेँ
इंतजार का एहसास ज्यादा है।

इंतजार पहले भी था पर
जवानी की उमंगों में
वह कुछ छिप जाता था
ज्यादा नजर नहीँ आता था
पर अब छुपने वाला पर्दा
गायब हो चुका है
और अब घूरता है हमेँ
शुबह शाम
हर पल
लगातार
इंतजार।

इच्छा है तो इंतजार है
इंतजार खत्म तो
शांत जीवन
पल पल इन्तेजार मुक्त जीवन।

मैँ अक्सर मन से पूछता हूँ
किस चीज की इच्छा करता है
पर वह साफ़ नकार देता है
पर सच तो यह है कि
वह छिपता है
बताने मेँ शर्माता है
सच तो यह है कि इच्छाएं हैं अभी भी
ढेर सारी
और इसी लिये इंतजार भी है।

मैं मन से कहता हूं
सुन, अब जीवन बाकी है एक आध दशक
क्या करना इच्छाएं पाल के
अब तो विदाई ही सोच
बांध सामान
वह हां में हां मिलाता है
पर फिर भी छुप छुप कर
पालता  ही जाता है
इच्छाएं हजार
और मेरे पल्ले पड़ता है
इंतजार
सिर्फ इंतजार।

~ राजीव सक्सेना

 
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