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Posted on Dec 9, 2015 in Contemplation Poems, Life And Time Poems | 0 comments

हम न रहेंगे – केदार नाथ अग्रवाल

हम न रहेंगे – केदार नाथ अग्रवाल

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The life goes on, even after we leave. In all its colors and glory, the life goes on. Rajiv Krishna Saxena

हम न रहेंगे
तब भी तो यह खेत रहेंगे,
इन खेतों पर घन लहराते
शेष रहेंगे,
जीवन देते
प्यास बुझाते
माटी को मदमस्त बनाते
श्याम बदरिया के
लहराते केश रहेंगे।

हम न रहेंगे
तब भी तो रतिरंग रहेंगे,
लाल कमल के साथ
पुलकते भृंग रहेंगे,
मधु के दानी
मोद मनाते
भूतल को रससिक्त बनाते
लाल चुनरिया में लहराते
अंग रहेंगे।

∼ केदार नाथ अग्रवाल

 
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