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Posted on Feb 1, 2016 in Contemplation Poems, Life And Time Poems, Shabda Chitra Poems | 0 comments

ब्याह की शाम – अजित कुमार

ब्याह की शाम – अजित कुमार

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A bride waiting to be married. What is she thinking as the night of grand ceremonies approaches? Some excitement, some apprehensions and regrets… Read this lovely poem by Ajit Kumar. Rajiv Krishna Saxena

ब्याह की यह शाम‚
आधी रात को भाँवर पड़ेंगी।
आज तो रो लो तनिक‚ सखि।

गूँजती हैं ढोलके–
औ’ तेज स्वर में चीखते– से हैं खुशी के गीत।
बंद आँखों को किये चुपचाप‚
सोचती होगी कि आएंगे नयन के मीत
सज रहे होंगे नयन पर हास‚
उठ रहे होंगे हृदय में आश औ’ विश्वास के आधार
नाचते होंगे पलक पर
दो दिनों के बाद के… आलिंगनों के‚ चुंबनों के वे सतत व्यापार
जिंदगी के घोर अनियम में‚ अनिश्चय में
नहीं हैं मानते जो हार।

किंतु संध्या की उदासी मिट नहीं पाती‚
बजें कितने खुशी के गीत
और जीवन के अनिश्चय बन न पाते कभी निश्चय‚
हाय। क्रम इस जिंदगी के… साथ के विपरीत।
साँवली इस शाम की परछाइयाँ कुछ देर में
आकाश पर तारे जड़ेंगी‚

अश्रुओं के तारकों को तुम संजो लो
आज तो रो लो तनिक सखि‚
ब्याह की यह शाम‚
आधी रात को भांवर पड़ेंगी।

~ अजित कुमार

 
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