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Posted on Sep 17, 2015 in Contemplation Poems, Frustration Poems | 0 comments

आनंद बक्शी: दो गीत

आनंद बक्शी: दो गीत

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Many Bollywood songs have deep meanings and are immortal. Here are two old songs from films My Love and Amar Prem. Rajiv Krishna Saxena

वो तेरे प्यार का ग़म, एक बहाना था सनम
अपनी क़िस्मत ही कुछ ऐसी थी
के दिल टूट गया

ये ना होता तो कोई दूसरा ग़म होना था
मैं तो वो हूँ जिसे हर हाल में बस रोना था
मुस्कुराता भी अगर, तो छलक जाती नज़र
अपनी क़िस्मत ही कुछ ऐसी थी
के दिल टूट गया…

वरना क्या बात है तू कोई सितमगर तो नहीं
तेरे सीने में भी दिल है कोई पत्थर तो नहीं
तूने ढाया है सितम, तो यही समझेंगे हम
अपनी क़िस्मत ही कुछ ऐसी थी
के दिल टूट गया…

वो तेरे प्यार का ग़म, एक बहाना था सनम
अपनी क़िस्मत ही कुछ ऐसी थी
के दिल टूट गया…


कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना

कुछ रीत जगत की ऐसी है, हर एक सुबह की शाम हुई
तू कौन है, तेरा नाम है क्या, सीता भी यहाँ बदनाम हुई
फिर क्यूँ संसार की बातों से, भीग गये तेरे नयना
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना
कुछ तो लोग कहेंगे…

हमको जो ताने देते हैं, हम खोए हैं इन रंगरलियों में
हमने उनको भी छुप छुपके, आते देखा इन गलियों में
ये सच है झूठी बात नहीं, तुम बोलो ये सच है ना
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना
कुछ तो लोग कहेंगे…

∼ आनंद बक्षी

 
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