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Posted on Nov 3, 2015 in Bal Kavita | 0 comments

सूरज भाई – इंदिरा गौड़

सूरज भाई – इंदिरा गौड़

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Here is a sweet little children’s poem on the Sun. Rajiv Krishna Saxena

क्या कहने हैं सूरज भाई
अच्छी खूब दुकान सजाई

और दिनों की तरह आज भी
जमा दिया है खूब अखाड़ा
पहले किरणों की झाड़ू से
घना अँधेरा तुमने झाड़ा
फिर कोहरे को पोंछ उषा की
लाल लाल चादर फैलाई।

ज्यों ही तुमको आते देखा
डर कर दूर अँधेरा भागा
दिन भर की आपा धापी से
थक कर जो सोया था जागा
झाँक झाँक कर खिड़की द्वारे
जब तुमने आवाज लगाई।

दिन भर अपना सौदा बेचा
जैसे किरण, धूप, गरमाहट
शाम हुई दूकान समेटी
उठा लिया सामान फटाफट
वस फिर उस दिन बादल आए
जिस दिन लेटे ओढ़ रजाई।

~ इंदिरा गौड़

 
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