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Posted on Dec 3, 2015 in Bal Kavita, Inspirational Poems | 0 comments

सुबह – श्री प्रसाद

सुबह – श्री प्रसाद

Introduction: See more

Here is a simple and very sweet poem that many have read in school days. Lots of nostalgia here! Rajiv Krishna Saxena

सूरज की किरणें आती हैं,
सारी कलियाँ खिल जाती हैं,
अंधकार सब खो जाता है,
सब जग सुंदर हो जाता है।

चिड़ियाँ गाती हैं मिलजुल कर,
बहते हैं उनके मीठे स्वर,
ठंडी ढंडी हवा सुहानी,
चलती है जैसे मस्तानी।

ये प्रातः की सुख­बेला है,
धरती का सुख अलबेला है,
नई ताज़गी नई कहानी,
नया जोश पाते हैं प्राणी।

खो देते हैं आलस सारा,
और काम लगता है प्यारा,
सुबह भली लगती उनको,
मेहनत प्यारी लगती जिनको।

मेहनता सबसे अच्छा गुण है,
आलस बहुत बड़ा दुर्गुण है,
अगर सुबह भी अलसा जाए,
तो क्या जग सुंदर हो पाए।

~ श्री प्रसाद

 
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