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Posted on Dec 2, 2015 in Bal Kavita, Desh Prem Poems, Veer Ras Poems | 0 comments

रुके न तू – हरिवंश राय बच्चन

रुके न तू – हरिवंश राय बच्चन

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Here is an exhortation from Harivansh Rai Bachchan to leave inaction and to work with full enthusiasm and vigor. A good poem for children to recite. Rajiv Krishna Saxena

धरा हिला, गगन गुँजा
नदी बहा, पवन चला
विजय तेरी, विजय तेरीे
ज्योति सी जल, जला
भुजा–भुजा, फड़क–फड़क
रक्त में धड़क–धड़क

धनुष उठा, प्रहार कर
तू सबसे पहला वार कर
अग्नि सी धधक–धधक
हिरन सी सजग सजग
सिंह सी दहाड़ कर
शंख सी पुकार कर

रुके न तू, थके न तू
झुके न तू, थमे न तू
सदा चले, थके न तू
रुके न तू, झुके न तू

∼ हरिवंश राय बच्चन

 
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