Pages Menu
TwitterRssFacebook
Categories Menu

Posted on Mar 17, 2016 in Bal Kavita, Desh Prem Poems, Inspirational Poems, Old Classic Poems | 0 comments

पुष्प की अभिलाषा – माखनलाल चतुर्वेदी

पुष्प की अभिलाषा – माखनलाल चतुर्वेदी

Introduction: See more

Here is an old classic, the desire of a flower by Makhanlal Chaturvedi Ji – Rajiv Krishna Saxena

चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ

चाह नहीं, प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ

चाह नहीं, सम्राटों के शव
पर हे हरि, डाला जाऊँ

चाह नहीं, देवों के सिर पर
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ

मुझे तोड़ लेना वनमाली
उस पथ पर देना तुम फेंक

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पर जावें वीर अनेक

∼ माखनलाल चतुर्वेदी

 
Classic View Home

2,252 total views, 2 views today

Post a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *