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Posted on May 22, 2017 in Bal Kavita | 0 comments

मचा तहलका – उमा कांत मालवीय

मचा तहलका – उमा कांत मालवीय

Introduction: See more

A nice little poem for children by Uma Kant Malaviya. Rajiv Krishna Saxena

बैठ पेड़ पर मछली सोचे
अब क्या होगा राम,
नज़ला हुआ मगर मामा को
मुझको हुआ जु.काम।

छाँय छाँय कर मेढक जी ने
छींका क्या दो बार,
पोखर भर में मचा तहलका
मेढक जी बीमार।

भागा पोखर से तब कछुआ
सिर पर रखकर पाँव,
लेकिन देखा छाँय–छाँय कर
छींके सारा गाँव।

~ उमा कांत मालवीय

 
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