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Posted on Nov 13, 2015 in Bal Kavita | 1 comment

कोयल – सुभद्रा कुमारी चौहान

कोयल – सुभद्रा कुमारी चौहान

Introduction: See more

Here is an old classic poem that many of us have read in childhood. Poetess is the Late and Great Subhadra Kumari Chauhan. Many of her other very famous poems like Khoob Ladi Mardani Vo to Jhansi Vaali Rani Thi, are available on Geeta-Kavita.com. Rajiv Krishna Saxena

देखो कोयल काली है
पर मीठी है इसकी बोली
इसने ही तो कूक–कूक कर
आमों में मिसरी घोली
कोयल कोयल सच बतलाओ
क्या संदेशा लाई हो
बहुत दिनों के बाद आज फिर
इस डाली पर आई हो

क्या गाती हो किसे बुलाती
बतला दो कोयल रानी
प्यासी धरती देख माँगती
क्या मेघों से पानी?
कोयल यह मिठास क्या तुमने
अपनी माँ से पाई है
माँ ने ही क्या मीठी बोली
यह सिखलाई है

डाल डाल पर उड़ना–गाना
जिसने तुम्हें सिखाया है
सबसे मीठे–मीठे बोलो
यह भी तुम्हें बताया है
बहुत भली हो तुमने माँ की
बात सदा ही मानी है
इसीलिये तो तुम कहलाती
हो सब चिड़ियों की रानी

~ सुभद्रा कुमारी चौहान

 
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1 Comment

  1. i want sarance

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