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Posted on Nov 30, 2015 in Bal Kavita | 0 comments

कौन सिखाता है चिड़ियों को – सोहनलाल द्विवेदी

कौन सिखाता है चिड़ियों को – सोहनलाल द्विवेदी

Introduction: See more

Here is a popular poem of Sohanlal Dwivedi Ji. Who teaches birds… Many would have read it in school days. Rajiv Krishna Saxena

कौन सिखाता है चिडियों को
चीं–चीं चीं–चीं करना?
कौन सिखाता फुदक–फुदक कर
उनको चलना फिरना?

कौन सिखाता फुर से उड़ना
दाने चुग-चुग खाना?
कौन सिखाता तिनके ला–ला
कर घोंसले बनाना?

कौन सिखाता है बच्चों का
लालन-पालन उनको?
माँ का प्यार, दुलार, चौकसी
कौन सिखाता उनको?

कुदरत का यह खेल,
वही हम सबको, सब कुछ देती।
किन्तु नहीं बदले में हमसे
वह कुछ भी है लेती।

हम सब उसके अंश
कि जैसे तरू–पशु–पक्षी सारे।
हम सब उसके वंशज
जैसे सूरज–चांद–सितारे।

∼ सोहनलाल द्विवेदी

 
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