Pages Menu
TwitterRssFacebook
Categories Menu

Posted on Jan 4, 2016 in Bal Kavita, Shabda Chitra Poems | 0 comments

कछुआ जल का राजा है – राजीव कृष्ण सक्सेना

कछुआ जल का राजा है – राजीव कृष्ण सक्सेना

Introduction: See more

I wrote this nursery rhyme to complement the poem Machhli Jal Ki Rani Hai. Art work is mine too – Rajiv Krishna Saxena

कछुआ जल का राजा है,
कितना मोटा ताजा है।

हाथ लगाओ कूदेगा,
बाहर निकालो ऊबेगा।

सबको डांट लगाएगा,
घर का काम कराएगा।

बच्चों के संग खेलेगा,
पूरी मोटी बेलेगा।

चाट पापड़ी खाएगा,
ऊंचे सुर में गाएगा।

∼ राजीव कृष्ण सक्सेना

 
Classic View  Home

2,756 total views, 3 views today

Post a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *